श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.38.6 
द्वारवत्या विनिष्क्रान्ता: कृष्णपत्न्य: सहस्रश:।
वज्रं जनं च कौन्तेय: पालयञ्छनकैर्ययौ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन धीरे-धीरे आगे बढ़े और द्वारका से आई हुई कृष्णचन्द्र की हजारों पत्नियों, वज्र तथा अन्य सम्बन्धियों की रक्षा करते रहे।
 
Arjuna moved slowly, [carefully] protecting the thousands of wives of Krsnachandra who had come out of Dvaraka, as well as Vajra and other relatives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)