श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  5.38.58 
कालस्वरूपी भगवान‍्कृष्ण: कमललोचन:।
यच्चात्थ कृष्णमाहात्म्यं तत्तथैव धनञ्जय॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! तुमने जो कृष्णचन्द्र का माहात्म्य बताया है, वह सब सत्य है; क्योंकि कमलनयन भगवान श्रीकृष्ण स्वयं काल के स्वरूप हैं॥58॥
 
Hey Dhananjay! The greatness of Krishnachandra that you have described is all true; Because lotus-eyed Lord Krishna is the embodiment of time itself. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)