श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  5.38.55 
कालो भवाय भूतानामभवाय च पाण्डव।
कालमूलमिदं ज्ञात्वा भव स्थैर्यपरोऽर्जुन॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डवों! जीवों की गति और अवनति का कारण काल ​​ही है, अतः हे अर्जुन! इन जय-पराजय को काल के अधीन समझकर स्थिर रहो ॥55॥
 
Hey Pandavas! Time is the reason for the progress and decline of living beings, hence O Arjun! Consider these victories and defeats as dependent on time and maintain stability. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)