श्रीव्यास उवाच
अलं ते व्रीडया पार्थ न त्वं शोचितुमर्हसि।
अवेहि सर्वभूतेषु कालस्य गतिरीदृशी॥ ५४॥
अनुवाद
श्रीव्यास बोले, हे पार्थ! तुम्हारी लज्जा व्यर्थ है, तुम्हारा शोक करना उचित नहीं है। तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि सभी प्राणियों में काल की यही नियति है ॥ 54॥
Sri Vyasa said, O Parth! Your shame is in vain, it is not right for you to grieve. You should know that this is the fate of time in all beings. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)