श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.38.52 
आनीयमानमाभीरै: कृष्ण कृष्णावरोधनम्।
हृतं यष्टिप्रहरणै: परिभूय बलं मम॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे कृष्णद्वैपायन! वे आभीर, जिनके शस्त्र केवल दण्ड हैं, आज मेरे बल को कुचलकर मेरे साथ लाए हुए सम्पूर्ण कृष्ण-परिवार को छीन ले गए हैं॥ 52॥
 
O Krishnadwaipayana, those Abhiras, whose weapons are only sticks, have today crushed my strength and taken away the entire Krishna-family that I had brought with me.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)