श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.38.51 
स्त्रीसहस्राण्यनेकानि मन्नाथानि महामुने।
यततो मम नीतानि दस्युभिर्लगुडायुधै:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! मेरे संरक्षण में रहने वाली भगवान की हजारों स्त्रियों को मेरे लाख प्रयत्न करने पर भी डाकुओं ने लाठी के बल पर हर लिया।
 
O great sage! The thousands of women of the Lord who were under my care were taken away by the bandits with the help of their sticks in spite of my best efforts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)