श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.38.40 
कच्चिन्नु शूर्पवातस्य गोचरत्वं गतोऽर्जुन।
दुष्टचक्षुर्हतो वाऽसि निश्श्रीक: कथमन्यथा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! क्या तूने फटकने वाली टोकरी की हवा नहीं ली? क्या तेरी आँखें दुख रही हैं या किसी ने तुझे मारा है? तू इतना दीन कैसे हो गया है?॥40॥
 
O Arjuna, have you not inhaled the air from the winnowing basket? Do your eyes hurt or has someone beaten you? How are you becoming so destitute?॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)