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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 4
श्लोक
5.38.4
उग्रसेनस्तु तच्छ्रुत्वा तथैवानकदुन्दुभि:।
देवकी रोहिणी चैव विविशुर्जातवेदसम्॥ ४॥
अनुवाद
इस सम्पूर्ण विपत्ति का समाचार सुनकर उग्रसेन, वसुदेव, देवकी और रोहिणी भी अग्नि में प्रविष्ट हो गए॥4॥
On hearing the news of this complete disaster, Ugrasen, Vasudev, Devaki and Rohini also entered the fire. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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