श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.38.39 
भुङ्‍क्तेऽप्रदाय विप्रेभ्यो मिष्टमेकोऽथ वा भवान्।
किं वा कृपणवित्तानि हृतानि भवतार्जुन॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! क्या तू ब्राह्मणों को दिए बिना स्वयं ही मिठाई खाता है अथवा किसी कंजूस का धन चुराता है?
 
O Arjuna, do you eat the sweets yourself without giving it to the brahmins or have you stolen the wealth of some miser? 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)