vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
»
श्लोक 35
श्लोक
5.38.35
स ददर्श ततो व्यासं फाल्गुन: काननाश्रयम्।
तमुपेत्य महाभागं विनयेनाभ्यवादयत्॥ ३५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वह वन में रहने वाले महर्षि व्यास से मिला और उन महर्षि के पास जाकर उन्हें नम्रतापूर्वक प्रणाम किया ॥35॥
Thereafter he met the sage Vyasa who lived in the forest and went near that great sage and bowed to him with humility. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×