श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.38.30 
तद्धनुस्तानि शस्त्राणि स रथस्ते च वाजिन:।
सर्वमेकपदे नष्टं दानमश्रोत्रिये यथा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
देखो, यह वही धनुष है, वही अस्त्र-शस्त्र हैं, वही रथ है और वही घोड़े हैं, परंतु आज ये सब एक साथ नष्ट हो गए, मानो किसी अवर्णी पुरुष को दिया गया दान हो ॥30॥
 
Look, it is the same bow, the same weapons, the same chariot and the same horses, but today all of them were destroyed together, like donations given to a non-black man. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)