श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.38.29 
ततस्सुदु:खितो जिष्णु: कष्टं कष्टमिति ब्रुवन्।
अहो भगवतानेन वञ्चितोऽस्मि रुरोद ह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब सदा विजयी रहने वाला अर्जुन अत्यन्त दुःखी होकर रोने लगा और कहने लगा - 'हाय! क्या कष्ट है? क्या कष्ट है?' [और बोला -] 'हाय! भगवान् ने ही मुझे धोखा दिया है॥29॥
 
Then Arjuna, who was always victorious, became very sad and started crying saying, 'Oh! What is the trouble? What is the trouble?' [And said -] 'Oh! The Lord himself has deceived me.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)