श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.38.25 
अचिन्तयच्च कौन्तेय: कृष्णस्यैव हि तद‍्बलम्।
यन्मया शरसङ्घातैस्सकला भूभृतो हता:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने सोचा कि मैंने जो इतने राजाओं को अपने बाणों से मारा है, वह भगवान श्रीकृष्ण के प्रभाव के कारण ही है।
 
Then Arjun thought that the fact that he had killed so many kings with his arrows was due to the influence of Lord Krishna. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)