श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.38.22 
चकार सज्यं कृच्छ्राच्च तच्चाभूच्छिथिलं पुन:।
न सस्मार ततोऽस्त्राणि चिन्तयन्नपि पाण्डव:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
किसी तरह बड़ी मुश्किल से उसने धनुष पर डोरी चढ़ा ली, लेकिन फिर वह कमजोर हो गया और बहुत सोचने पर भी उसे अपने हथियार याद नहीं रहे।
 
Somehow, with great difficulty he strung the bowstring, but then he became weak and in spite of much thinking, he could not remember his weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)