श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.38.20 
अवज्ञाय वचस्तस्य जगृहुस्ते तदा धनम्।
स्त्रीधनं चैव मैत्रेय विष्वक्सेनपरिग्रहम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे मैत्रेय! लुटेरों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया और भगवान कृष्ण की सारी संपत्ति और स्त्रियों पर कब्जा कर लिया।
 
But, O Maitreya, the robbers did not pay any heed to his words and took possession of all the wealth and women of Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)