श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.38.14 
ततस्ते पापकर्माणो लोभोपहृतचेतस:।
आभीरा मन्त्रयामासुस्समेत्यात्यन्तदुर्मदा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब वे अत्यन्त दुष्ट, दुराचारी और कामी हृदय वाले दुष्ट लोग आपस में मिलकर आपस में परामर्श करने लगे- 14॥
 
Then those extremely wicked, evil-doing and lustful-hearted dastards met together and took advice - 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)