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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 11
श्लोक
5.38.11
तदतीव महापुण्यं सर्वपातकनाशनम्।
विष्णुश्रियान्वितं स्थानं दृष्ट्वा पापाद्विमुच्यते॥ ११॥
अनुवाद
वह दिव्य कृपा से परिपूर्ण स्थान परम पवित्र और समस्त पापों का नाश करने वाला है; उसके दर्शन मात्र से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है ॥11॥
That place full of the divine grace is most holy and destroyer of all sins; by merely seeing it a man is freed from all sins. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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