श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.38.10 
नातिक्रान्तुमलं ब्रह्मंस्तदद्यापि महोदधि:।
नित्यं सन्निहितस्तत्र भगवान‍्केशवो यत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! आज भी समुद्र उसे डुबाने में समर्थ नहीं है; क्योंकि भगवान श्रीकृष्णचन्द्र उसमें सदैव निवास करते हैं॥10॥
 
Hey Brahman! Even today the sea is not capable of drowning him; Because Lord Krishnachandra always resides in it. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)