श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  5.37.9-10 
श्रीपराशर उवाच
दिव्यज्ञानोपपन्नास्ते विप्रलब्धा: कुमारकै:।
मुनय: कुपिता: प्रोचुर्मुसलं जनयिष्यति॥ ९॥
सर्वयादवसंहारकारणं भुवनोत्तरम्।
येनाखिलकुलोत्सादो यादवानां भविष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - यदुपुत्रों द्वारा इस प्रकार छले जाने पर दिव्य ज्ञान से संपन्न ऋषियों ने क्रोधित होकर कहा - "वह दूसरे लोक से एक मूसल को जन्म देगी, जो समस्त यादवों के विनाश का कारण होगा और जिसके कारण यादवों का समस्त कुल संसार से नष्ट हो जाएगा॥9-10॥
 
Shri Parashar Ji said - On being deceived by the sons of Yadu in this manner, the sages endowed with divine knowledge became angry and said - "She will give birth to a pestle from another world, which will be the cause of destruction of all the Yadavas and due to which the entire clan of the Yadavas will be wiped out from the world.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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