श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.37.73 
विमानमागतं सद्यस्तद्वाक्यसमनन्तरम्।
आरुह्य प्रययौ स्वर्गं लुब्धकस्तत्प्रसादत:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
भगवान के ये वचन समाप्त होते ही एक विमान वहाँ आ पहुँचा और शिकारी उस पर सवार होकर भगवान की कृपा से तुरन्त स्वर्ग को चला गया। 73.
 
As soon as these words of the Lord were finished, a plane arrived there and the hunter boarded it and by the grace of the Lord immediately went to heaven. 73.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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