श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.37.72 
श्रीपराशर उवाच
ततस्तं भगवानाह न तेऽस्तु भयमण्वपि।
गच्छ त्वं मत्प्रसादेन लुब्ध स्वर्गं सुरास्पदम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - तब प्रभु ने उससे कहा - "लुब्धक! तू बिलकुल मत डर; मेरी कृपा से तू अभी देवताओं के धाम स्वर्ग को जा सकता है।"
 
Shri Parashar Ji said - Then the Lord said to him - "Lubdhak! Do not be afraid at all; by my grace you can go right now to heaven, the abode of the gods. 72.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas