श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.37.70 
ततश्च ददृशे तत्र चतुर्बाहुधरं नरम्।
प्रणिपत्याह चैवैनं प्रसीदेति पुन: पुन:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वहाँ पहुँचकर उसने एक चार भुजाओं वाले पुरुष को देखा। उसे देखते ही वह उसके चरणों में गिर पड़ा और बार-बार उससे कहने लगा - "सुखी रहो, सुखी रहो।" 70.
 
But on reaching there he saw a man with four arms. On seeing him he fell at his feet and repeatedly started saying to him - "Be happy, be happy". 70.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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