| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना » श्लोक 7-8 |
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| | | | श्लोक 5.37.7-8  | ततस्ते यौवनोन्मत्ता भाविकार्यप्रचोदिता:।
साम्बं जाम्बवतीपुत्रं भूषयित्वा स्त्रियं यथा॥ ७॥
प्रश्रितास्तान्मुनीनूचु: प्रणिपातपुरस्सरम्।
इयं स्त्री पुत्रकामा वै ब्रूत किं जनयिष्यति॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | तब उन यौवन से उन्मत्त बालकों ने वचन से प्रेरित होकर जाम्बवती के पुत्र साम्ब को स्त्री का वेश बनाकर उन ऋषियों को प्रणाम करके बड़ी विनम्रता से पूछा - "हे ऋषिवर! यह स्त्री पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखती है! कहिए, इससे क्या होगा?" 7-8॥ | | | | Then those children, who were crazy with youth, inspired by the promise, disguised Jambavati's son Samb as a woman and after paying obeisance to those sages, asked very politely - "This woman wishes to have a son, O sage!" Tell me, what will it do?'' 7-8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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