श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  5.37.65 
स च गत्वा तदाचष्ट द्वारकायां तथार्जुनम्।
आनिनाय महाबुद्धिर्वज्रं चक्रे तथा नृपम्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
उस महाबुद्धिमान ने द्वारका पहुँचकर सारा वृत्तांत सुनाया और अर्जुन को वहाँ लाकर वज्र का राज्याभिषेक किया ॥65॥
 
That great intellect reached Dwarka and narrated the whole story and brought Arjun there and crowned Vajra. 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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