श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.37.64 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तो दारुक: कृष्णं प्रणिपत्य पुन: पुन:।
प्रदक्षिणं च बहुश: कृत्वा प्रायाद्यथोदितम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले: भगवान कृष्ण की यह बात सुनकर दारुक ने बार-बार उन्हें प्रणाम किया, उनकी कई परिक्रमाएँ कीं और उनके आदेशानुसार चला गया।
 
Shri Parashara said: Upon hearing Lord Krishna say this, Daruka repeatedly bowed before Him, did several parikramas around Him and went away as per His instructions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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