| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना » श्लोक 60-61 |
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| | | | श्लोक 5.37.60-61  | तस्माद्भवद्भिस्सर्वैस्तु प्रतीक्ष्यो ह्यर्जुनागम:।
न स्थेयं द्वारकामध्ये निष्क्रान्ते तत्र पाण्डवे॥ ६०॥
तेनैव सह गन्तव्यं यत्र याति स कौरव:॥ ६१॥ | | | | | | अनुवाद | | इसलिये तुम सब लोग अर्जुन के आने की प्रतीक्षा करो और जैसे ही अर्जुन यहाँ से लौट जाये, द्वारका में कोई न रहे; जहाँ कहीं वह कृष्णपुत्र जाये, वहाँ सब लोग चले जाएँ। 60-61। | | | | Therefore all of you should just wait for the arrival of Arjuna and as soon as Arjuna returns from here no one should stay in Dwarka; wherever that son of Krishna goes everyone should go there. 60-61. | | ✨ ai-generated | | |
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