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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 6
श्लोक
5.37.6
श्रीपराशर उवाच
विश्वामित्रस्तथा कण्वो नारदश्च महामुनि:।
पिण्डारके महातीर्थे दृष्टा यदुकुमारकै:॥ ६॥
अनुवाद
श्री पाराशरजी ने कहा - एक बार कुछ यदुकुमारों ने महातीर्थ पिंडारक क्षेत्र में विश्वामित्र, कण्व और नारद आदि महान ऋषियों को देखा। 6॥
Shri Parasharji said - Once some Yadukumars saw great sages like Vishwamitra, Kanva and Narad etc. in the area of Mahatirtha Pindarak. 6॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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