vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
»
श्लोक 59
श्लोक
5.37.59
वाच्यश्च द्वारकावासी जनस्सर्वस्तथाहुक:।
यथेमां नगरीं सर्वां समुद्र: प्लावयिष्यति॥ ५९॥
अनुवाद
द्वारका के सब निवासियों और आहुक (उग्रसेन) से कहो कि अब समुद्र इस सम्पूर्ण नगरी को डुबा देगा ॥59॥
Tell all the residents of Dvaraka and Aahuka (Ugrasena) that now the sea will submerge this entire city. ॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×