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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 59
श्लोक
5.37.59
वाच्यश्च द्वारकावासी जनस्सर्वस्तथाहुक:।
यथेमां नगरीं सर्वां समुद्र: प्लावयिष्यति॥ ५९॥
अनुवाद
द्वारका के सब निवासियों और आहुक (उग्रसेन) से कहो कि अब समुद्र इस सम्पूर्ण नगरी को डुबा देगा ॥59॥
Tell all the residents of Dvaraka and Aahuka (Ugrasena) that now the sea will submerge this entire city. ॥ 59॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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