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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 58
श्लोक
5.37.58
निर्याणं बलभद्रस्य यादवानां तथा क्षयम्।
योगे स्थित्वाहमप्येतत्परित्यक्ष्ये कलेवरम्॥ ५८॥
अनुवाद
बलभद्र की मृत्यु, यादवों का विनाश और मैं भी योगावस्था में शरीर त्याग दूँगा - यह सब समाचार तुम जाकर उनसे कहो ॥58॥
Balabhadra's death, the destruction of the Yadavas, and I too, shall give up my body in a state of Yoga - go and tell them all this news. ॥ 58॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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