श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.37.57 
दृष्ट्वा बलस्य निर्याणं दारुकं प्राह केशव:।
इदं सर्वं समाचक्ष्व वसुदेवोग्रसेनयो:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
बलरामजी को इस प्रकार जाते देख श्रीकृष्णचन्द्र ने दारुक से कहा, "जाओ और उग्रसेन तथा वसुदेव से यह सब कहो।"
 
Seeing Balarama's departure in this manner, Sri Krishnachandra said to Daruk, "Go and tell all this to Ugrasen and Vasudeva."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)