श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.37.53 
क्षणेन नाभवत्कश्चिद्यादवानामघातित:।
ऋते कृष्णं महात्मानं दारुकं च महामुने॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! क्षण भर में ही महात्मा कृष्णचन्द्र और उनके सारथी दारुक के अतिरिक्त कोई भी यदुवंशी जीवित नहीं बचा ॥53॥
 
Oh great sage! Within a moment, except Mahatma Krishnachandra and his charioteer Daruk, no other Yaduvanshi was left alive. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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