vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
»
श्लोक 53
श्लोक
5.37.53
क्षणेन नाभवत्कश्चिद्यादवानामघातित:।
ऋते कृष्णं महात्मानं दारुकं च महामुने॥ ५३॥
अनुवाद
हे महामुनि! क्षण भर में ही महात्मा कृष्णचन्द्र और उनके सारथी दारुक के अतिरिक्त कोई भी यदुवंशी जीवित नहीं बचा ॥53॥
Oh great sage! Within a moment, except Mahatma Krishnachandra and his charioteer Daruk, no other Yaduvanshi was left alive. 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×