श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.37.52 
चक्रं गदा तथा शार्ङ्गं तूणी शङ्खोऽसिरेव च।
प्रदक्षिणं हरिं कृत्वा जग्मुरादित्यवर्त्मना॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भगवान् के शंख, चक्र, गदा, धनुष, तरकश और तलवार आदि आयुध श्रीहरि की परिक्रमा करके सूर्य मार्ग से चले गए ॥52॥
 
After this, the Lord's weapons like conch, disc, mace, bow, quiver and sword etc. circumambulated Sri Hari and went away from the sun path. 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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