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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 49
श्लोक
5.37.49
कृष्णोऽपि कुपितस्तेषामेरकामुष्टिमाददे।
वधाय सोऽपि मुसलं मुष्टिर्लौहमभूत्तदा॥ ४९॥
अनुवाद
कृष्णचन्द्र भी क्रोधित हो उठे और उसे मारने के लिए मुट्ठी भर सरकंडे उठा लिए। वे मुट्ठी भर सरकंडे लोहे के मूसलों के समान हो गए ॥49॥
Krishnachandra also became angry and picked up a handful of reeds to kill him. Those handful of reeds became like iron pestles. ॥ 49॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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