श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  5.37.46-47 
प्रद्युम्नसाम्बप्रमुखा: कृतवर्माथ सात्यकि:।
अनिरुद्धादयश्चान्ये पृथुर्विपृथुरेव च॥ ४६॥
चारुवर्मा चारुकश्च तथाक्रूरादयो द्विज।
एरकारूपिभिर्वज्रैस्ते निजघ्नु: परस्परम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! प्रद्युम्न और साम्ब, कृतवर्मा, सात्यकि और अनिरुद्ध जैसे कृष्ण के पुत्र तथा पृथु, विपृथु, चारुवर्मा, चारुक और अक्रूर जैसे यादव वज्र रूपी वज्रों से एक-दूसरे पर आक्रमण करने लगे। 46-47॥
 
Hey Dwija! Krishna's sons like Pradyumna and Samba, Kritavarma, Satyaki and Aniruddha and Yadavs like Prithu, Viprithu, Charuvarma, Charuk and Akrura started attacking each other with thunderbolts in the form of thunderbolts. 46-47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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