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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 45
श्लोक
5.37.45
एरका तु गृहीता वै वज्रभूतेव लक्ष्यते।
तया परस्परं जघ्नुस्संप्रहारे सुदारुणे॥ ४५॥
अनुवाद
उनके हाथों में जो सरकण्डे थे वे वज्र के समान प्रतीत हो रहे थे और उन्हीं सरकण्डों से वे उस घोर युद्ध में एक दूसरे पर आक्रमण करने लगे ॥45॥
The reeds in their hands appeared like thunderbolts, and with these very reeds they began to attack one another in that fierce battle. ॥ 45॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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