श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.37.41 
श्रीमैत्रेय उवाच
स्वं स्वं वै भुञ्जतां तेषां कलह: किन्निमित्तक:।
सङ्घर्षो वा द्विजश्रेष्ठ तन्ममाख्यातुमर्हसि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे ब्राह्मण! मुझे यह बताओ कि भोजन करते समय यादवों में झगड़ा (वाकयुद्ध) या मार-पीट क्यों हुई ॥ 41॥
 
Sri Maitreya said - O Brahmin! Tell me why there was a quarrel (war of words) or a fight (scuffle) amongst the Yadavas while they were eating their food. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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