श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.37.4 
उत्सृज्य द्वारकां कृष्णस्त्यक्त्वा मानुष्यमात्मन:।
सांशो विष्णुमयं स्थानं प्रविवेश मुने निजम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मुने! अन्त में द्वारकापुरी छोड़कर तथा अपना मानव शरीर त्यागकर श्री कृष्णचन्द्र अपने अंश (बलराम-प्रद्युम्नादि) सहित अपने विष्णुमय धाम में चले गए॥4॥
 
Hey Mune! At last, leaving Dwarkapuri and abandoning his human body, Shri Krishna Chandra along with his part (Balram-Pradyumnadi) entered his Vishnumay abode. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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