श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.37.39 
प्रभासं समनुप्राप्ता: कुकुरान्धकवृष्णय:।
चक्रुस्तत्र महापानं वासुदेवेन चोदिता:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर कुकुर, अंधक और वृष्णि आदि कुलों के सब यादवों ने कृष्णचन्द्र की प्रेरणा से उत्तम जलपान और भोजन ग्रहण किया॥39॥
 
After reaching there, all the Yadavas of clans like Kukur, Andhak and Vrishni etc. took great drinks and food with the inspiration of Krishnachandra. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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