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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 38
श्लोक
5.37.38
ततस्ते यादवास्सर्वे रथानारुह्य शीघ्रगान्।
प्रभासं प्रययुस्सार्धं कृष्णरामादिभिर्द्विज॥ ३८॥
अनुवाद
हे द्विज! तत्पश्चात् श्रीकृष्ण और बलराम आदि सभी यादव तीव्रगामी रथों पर चढ़कर प्रभास क्षेत्र में आये॥38॥
Hey Dwija! Thereafter, all the Yadavas including Krishna and Balram etc. mounted on fast moving chariots and came to Prabhas Kshetra. 38॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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