श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.37.35 
मन्मना मत्प्रसादेन तत्र सिद्धिमवाप्स्यसि।
अहं स्वर्गं गमिष्यामि ह्युपसंहृत्य वै कुलम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ तुम मेरा ध्यान करके मेरी कृपा से सिद्धि प्राप्त करोगे। अब मैं भी इस कुल का नाश करके स्वर्ग को जाऊँगा॥35॥
 
There you will attain success by my grace by focusing on me. Now I will also destroy this clan and go to heaven. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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