श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.37.34 
श्रीभगवानुवाच
गच्छ त्वं दिव्यया गत्या मत्प्रसादसमुत्थया।
यद‍्बदर्याश्रमं पुण्यं गन्धमादनपर्वते।
नरनारायणस्थाने तत्पवित्रं महीतले॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री ने कहा - हे उद्धव! अब मेरी कृपा से प्राप्त दिव्य गति से नर-नारायण के धाम गंधमादन पर्वत पर स्थित पवित्र बदरिकाश्रम क्षेत्र में जाओ। वह पृथ्वी पर सबसे पवित्र स्थान है। 34॥
 
Lord Shri said – O Uddhav! Now, with the divine speed obtained by my grace, go to the sacred Badarika Ashram area on Gandhamadan mountain, the abode of Nar-Narayan. That is the most sacred place on earth. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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