श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.37.30 
तान्दृष्ट्वा यादवानाह पश्यध्वमतिदारुणान्।
महोत्पाताञ्‍च्छमायैषां प्रभासं याम मा चिरम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यह उपद्रव देखकर भगवान् ने यादवों से कहा, "देखो, कैसा भयंकर उपद्रव हो रहा है; आओ, हम शीघ्र ही प्रभास क्षेत्र में जाकर उन्हें शांत करें।" ॥30॥
 
Seeing these disturbances the Lord said to the Yadavas, "Look, what a terrible disturbance is happening; let us quickly proceed to Prabhas Kshetra to pacify them." ॥30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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