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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 29
श्लोक
5.37.29
भगवानप्यथोत्पातान्दिव्यभौमान्तरिक्षजान्।
ददर्श द्वारकापुर्यां विनाशाय दिवानिशम्॥ २९॥
अनुवाद
भगवान् ने देखा कि द्वारकापुरी में दिन-रात प्रलयसूचक महान दिव्य, पार्थिव और ब्रह्मांडीय उत्पात हो रहे हैं ॥29॥
The Lord saw that day and night in Dvarakapuri, great divine, terrestrial and cosmic disturbances, indicating destruction, were taking place. ॥ 29॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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