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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 28
श्लोक
5.37.28
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन देवदूत: प्रणम्य तम्।
मैत्रेय दिव्यया गत्या देवराजान्तिकं ययौ॥ २८॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! भगवान वसुदेव की यह बात सुनकर वायुदेव ने उन्हें प्रणाम किया और अपनी दिव्य गति से देवताओं के राजा के पास आये।
Shri Parashara said - O Maitreya! On hearing Lord Vasudeva say this, the angel Vayu bowed to him and came to the king of gods with his divine speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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