श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.37.27 
तदेतं सुमहाभारमवतार्य क्षितेरहम्।
यास्याम्यमरलोकस्य पालनाय ब्रवीहि तान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसलिए तुम देवताओं से जाकर कहो कि जब मैं पृथ्वी से यह महान् भार हटा लूँगा, तभी मैं स्वर्ग की देखभाल करने के लिए स्वर्ग में आऊँगा॥ 27॥
 
Therefore you go and tell the gods that only after I have removed this great burden from the earth would I come to heaven to look after the heaven.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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