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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 22
श्लोक
5.37.22
श्रीभगवानुवाच
यत्त्वमात्थाखिलं दूत वेद्मॺेतदहमप्युत।
प्रारब्ध एव हि मया यादवानां परिक्षय:॥ २२॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे दूत! मैं तुम्हारी सारी बातें जानता हूँ, इसीलिए मैंने यादवों का विनाश आरम्भ कर दिया है।
Sri Bhagavan said - O messenger! I know everything that you are saying, that is why I have already started the destruction of the Yadavas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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