श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.37.20 
तदतीतं जगन्नाथ वर्षाणामधिकं शतम्।
इदानीं गम्यतां स्वर्गो भवता यदि रोचते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे जगन्नाथ! आपको इस धरती पर आए सौ साल से भी ज़्यादा हो गए हैं। अब अगर आप चाहें तो स्वर्ग जा सकते हैं।
 
O Jagannatha! It has been more than a hundred years since you came to this earth. Now if you wish, you may come to heaven.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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