| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 5.37.17  | वस्वश्विमरुदादित्यरुद्रसाध्यादिभिस्सह।
विज्ञापयति शक्रस्त्वां तदिदं श्रूयतां विभो॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | "हे विभो! वसुगण, अश्विनीकुमार, रुद्र, आदित्य, मरुद्गण और साध्यदिके सहित इन्द्र ने जो सन्देश तुम्हारे लिए भेजा है, उसे सुनो॥17॥ | | | | “Hey Vibho! Listen to the message that Indra has sent you along with Vasugana, Ashwinikumar, Rudra, Aditya, Marudgana and Sadhyadike. 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
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