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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 16
श्लोक
5.37.16
देवैश्च प्रहितो वायु: प्रणिपत्याह केशवम्।
रहस्येवमहं दूत: प्रहितो भगवन्सुरै:॥ १६॥
अनुवाद
इस समय देवताओं ने वायुदेव को भेजा। उन्होंने एकान्त में श्रीकृष्णचन्द्र को प्रणाम करके कहा - "प्रभो! देवताओं ने मुझे दूत बनाकर भेजा है।"
At this time the gods sent Vayu. He bowed to Shri Krishnachandra in private and said – “Lord! The gods have sent me as a messenger. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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