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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 37: ऋषियोंका शाप, यदुवंशविनाश तथा भगवान् का स्वधाम सिधारना
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श्लोक 12
श्लोक
5.37.12
तदुग्रसेनो मुसलमयश्चूर्णमकारयत्।
जज्ञे तदेरकाचूर्णं प्रक्षिप्तं तैर्महोदधौ॥ १२॥
अनुवाद
उग्रसेन ने लोहे के मूसल को चूर्ण-चूर्ण कर डाला और बालकों ने उसे समुद्र में फेंक दिया। तब वहाँ बहुत से सरकण्डे उग आए॥12॥
Ugrasena had the iron pestle crushed into powder and the boys took it and threw it into the sea. Thereupon many reeds grew there.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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